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खुतबा-ए-हज्जतुल विदा, मुसलमान इस पर अमल करें तो बदल जाएगी जिंदगी

तमाम तारीफें अल्लाह ही के लिए हैं, हम उसकी हम्द करते हैं, उसकी मदद चाहते हैं, उससे मगफिरत के तालिब हैं, अपने आमाल की बुराइयों से पनाह चाहते हैं, जिसकी अल्लाह रहनुमाई फ़रमाए उसे कोई गुमराह करने वाला नहीं, जिसे अल्लाह भटकने दे उसे कोई राह पर लाने वाला नहीं, मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह वहदहू ला शरीक के सिवा कोई माबूद नहीं, बादशाही उसी की है और उसी के लिए तमाम तारीफें हैं, वही ज़िन्दगी देता है और वही मारता है और वो हर चीज पर कादिर है नहीं है कोई माबूद अल्लाह के सिवा, मगर अल्लाह अकेला है खुदा ने अपना वादा पूरा किया, उसने बन्दे की मदद फरमाई और तन्हा उसकी जात ने सारे मुजतमा (जमा हुए) जत्थों को शिकस्त दी।

लोगो! मेरी बात गौर से सुनो! मेरा ख्याल है कि शायद इस साल के बाद मैं इस जगह तुमसे न मिल सकूँ और शायद इस साल के बाद हज न कर सकूँ। ऐ लोगो! अल्लाह तआला फरमाता है:"ऐ लोगो! हमने तुमको एक मर्द और एक औरत से पैदा किया है और तुम्हारे बहुत से ख़ानदान और क़बीले बना दिए हैं ताकि तुम पहचाने जा सको।खुदा के नज़दीक तुममें इज्जत वाला वो है जो तुममें सबसे ज़्यादा परहेज़गार

है।"पस न किसी अरबी को अजमी पर फ़ज़ीलत हासिल है और न किसी अजमी को किसी अरबी पर, न काला गोरे से अफ़ज़ल है और न गोरा काले से,फजीलत व बरतरी का इनहिसार सिर्फ तकवा पर है। सब लोग आदम की औलाद हैं और आदम मिट्टी से पैदा किए गए हैं। ख़बरदार! अब फ़ज़ीलत का हर दावा और उसकी बिना पर खून व माल के सारे मुतालबे मेरे पाँव के तले रोंदे जा चुके हैं।बस, बैतुल्लाह की तौलियत और हाजियों की ख़िदमत अला-हालिया बाक़ी रहेगी। ऐ कुरैश के लोगो! ऐसा न हो कि तुम ख़ुदा के हुजूर में इस तरह आओ कि तुम्हारी गरदनों पर दुनिया का बोझ लदा हो, और लोग सामाने-आख़िरत लेकर आएं इस सूरत में ख़ुदा के सामने मैं कुछ भी तुम्हारे काम न आ सकूँगा। ख़बरदार! ज़माना-ए-जाहलियत की तमाम रस्में मेरे पाँव तले रोंदी गयीं।ज़माना-ए-जाहलियत के खून के सारे इन्तकाम अब कालअदम हैं। मैं सबसे पहले अपने ही ख़ानदान का ख़ून जो-राबिया बिन अल-हारिस के दूध पीते बेटे का है-माफ़ करता हूँ। दौरे-जाहलियत का सूद अब ख़त्म किया जाता है और मैं सबसे पहले अपने चचा अब्बास बिन अब्दुल-मुत्तलिब का सूद माफ़ करता हूँ और अब यह कालअदम है। लोगो! तुम्हारे ख़ून तुम्हारे अमवाल और तुम्हारी इज्ज़त व आबरू की हुरमत इस तरह तुम पर वाजिब है जिस तरह तुम्हारे लिए इस दिन, इस महीने और इस शहर की हुरमत वाजिब है और अनक़ीब तुम अपने परवरदिगार से जा मिलोगे और तुम अपने आमाल के जवाबदेह होगे।

ऐ लोगो! तुम्हारी औरतों पर तुम्हारे कुछ हुकूक हैं और इसी तरह तुम पर कुछ इनके हुकूक वाजिब हैं। इन पर तुम्हारा यह हक़ है कि तुम्हारे बिस्तर पर किसी ऐसे शख़्स को न बैठने दें जिसको तुम नापसंद करते हो और इन पर तुम्हारा यह हक़ है कि वो तुम्हारे हुकूक की हिफाज़त करें कोई ख़यानत न करें
और बेहयाई का कोई काम न करें। अगर वो ऐसा करें तो तुम्हारे रब ने इसकी इजाज़त दी है कि तुम इनको अपनी ख़्वाबगाहों से अलेहदा कर दो (और इस पर भी बाज़ न आएं तो) उनको मामूली जिस्मानी सज़ा दो। अगर वो बाज़ जाएं तो उनको इस्बे दस्तूर खिलाओ, पिहनाओ।
ख़बरदार ! किसी औरत के लिए यह जाइज़ नहीं कि अपने शौहर के माल में से उसकी इजाज़त के बगैर किसी को कुछ दे।
औरतों के साथ बेहतर सुलूक करो क्योंकि वो तुम्हारी निगरानी में हैं और वो अपने लिए खुद कुछ नहीं कर सकतीं, औरतों के मामले में अल्लाह से डर रखो। तुमने इनको अल्लाह की अमानत के तौर पर हासिल किया है। कलिमातेइलाही के ज़रिए से इन्हें अपने लिए जाइज़ और हलाल किया है।
ऐ लोगो! अल्लाह 
उसका हक दे दिया है।
नहीं।
तआला ने (मीरास का कानून देकर) हर हक़दार को
इसलिए अब किसी वारिस के हक में कोई वसीयत रवा
बच्चा उसकी तरफ मन्सूब किया जाएगा जिसके बिस्तर पर वो पैदा हुआ।
जिसने हरामकारी की उसकी सज़ा संगसारी है और उसका हिसाब ख़ुदा के ज़िम्मे है। जो कोई नसब बदलेगा या अपने मालिक के बजाए किसी और को अपना मालिक ज़ाहिर करेगा उस पर ख़ुदा की लानत है। क़र्ज़ अदा किया जाएगा. आरयतन ली हुई चीज़ वापस की जाएगी, तोहफो का लेन-देन होगा, ज़ामिन तावान का जिम्मेदार होगा।जान लो! मुजरिम खुद अपने जुर्म का ज़िम्मेदार है। अब न बाप के बदले बेटा पकड़ा जाएगा और न बेटे का बदला बाप से लिया जाएगा। किसी शख्स के

लिए किसी भाई की चीज़ लेना जाइज़ नहीं जब तक कि वो अपनी ख़ुशी से न दे। बस, तुम बाहम एक दूसरे पर जुल्म-ज़्यादती न करो। लोगो! हर मुसलमान दूसरे मुसलमान का भाई है और तमाम मुसलमान बाहम भाई-भाई। तुम्हारे गुलाम (नौकर) तुम्हारे ख़िदमतगार हैं, तुम उनको वही खिलाओ जो तुम खुद खाते हो और वही पहनाओ जो तुम खुद पहनते हो।
ख़बरदार! मेरे बाद गुमराह न हो जाना कि आपस में एक दूसरे की गरदने मारने लगो। जिस किसी के पास अमानत हो तो उस पर लाज़िम है कि वो अमानत वाले को ठीक-ठीक अमानत अदा कर दे। अगर कोई नकटा, स्याहफाम हब्शी ही तुम्हारा अमीर बना दिया जाए और वो किताबुल्लाह के अहकाम के मुताबिक तुम्हारी क़यादत करे तो तुम उसको सुनो और उसकी इताअत करो।
ऐ लोगो! मेरे बाद कोई नबी नहीं है, और तुम्हारे बाद कोई नई उम्मत नहीं है। मैं तुम्हारे दरमियान ऐसी चीज़ छोड़े जाता हूँ कि अगर तुम इसे मज़बूती से थामे रहे तो कभी गुमराह नहीं होगे वो किताबुल्लाह (कुरआन मजीद) है। ऐ लोगो! मज़हब में गुलू और मुबालगे से बचो, क्योंकि तुमसे पहले बहुत सी क़ौमें मज़हब में गुलू इख़्तियार करने की वजह से बरबाद हुई हैं। ऐ लोगो! शैतान इस बात से मायूस हो चुका है कि इस शहर में अब कभी
उसकी इबादत की जाएगी। लेकिन इस बात का इम्कान है कि ऐसे आमाल में जिनको तुम कम अहम समझते हो इसकी बात मान ली जाएगी। इस पर भी वो खुश रहेगा। पस, तुम इससे अपने दीन को बचाकर रखना। पस, अपने रब की इबादत करो, पाँच वक्त नमाज अदा करो और माहे रमज़ान के रोज़े रखो, अपने माल की ज़कात खुशदिली से अदा करते रहो,
बैतुल्लाह का हज अदा करो, अपने उमरा (जो किताबे सुन्नत के मुताबिक हुक्मदे) के हुक्म पर चलो तुम अपने रब की जन्नत में दाख़िल हो जाओगे।में ऐ लोगो! नसी (यानी हुरमत वाले महीनों को आगे-पीछे करना) कुफ्र इज़ाफ़ा करता है। इससे वो लोग और भी गुमराह होते हैं जो काफिर हैं और जो एक साल उसे हराम रखते हैं और दूसरे साल हलाल कर लेते हैं। ताकि ये
काफ़िर लोग अल्लाह तआला के मुक़र्रर किए हुए महीनों की गिनती पूरी कर लें। इस तरह ये अल्लाह तआला की हराम चीज़ों को हलाल, हलाल चीज़ों को हराम कर लेते हैं। लेकिन अब ज़माना अपनी इब्तिदाई हालत पर लौट आया है। जिस
दिन ख़ुदा ने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया था। अल्लाह के साल के बारह महीने होते हैं जिनमें चार महीने हुरमत वाले हैं, तीन महीने मुसलसल हैं (जी-कअदा, जिल-हिज्जह, मुहर्रम) और एक माह रजब है जो जमादी- उस्सानी और शाबान के दरमियान पड़ता है।सुनो! जो लोग यहाँ मौजूद हैं वो मेरी बात उन लोगों तक पहुँचा दें जो यहाँ मौजूद नहीं हैं। क्योंकि बहुत से ऐसे लोग जिनको मेरा पैग़ाम पहुँचेगा वो इन लोगों से ज़्यादा इसे महफूज रखने वाले लोग होंगे। जो इस वक्त सुनने
वाले हैं। ऐ लोगो! जब मेरे बारे में सवाल किया जाएगा तो तुम क्या जवाब दोगे? 
हाज़िरीन ने (एक ज़बान होकर) जवाब दिया : "हम शहादत देते हैं कि आपने अमानत को पूरी तरह अदा किया, अल्लाह का पैग़ाम हम तक पहुँचा दिया और हमारी ख़ैर-ख़्वाही फ़रमाई।" फिर अल्लाह के रसूल ने शहादत की अंगुली आसमान की तरफ उठाई और फ़रमाया :
ऐ अल्लाह! तू गवाह रह
ऐ अल्लाह! तू गवाह रह
ऐ अल्लाह! तू गवाह रह

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