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*जय भीम के नारे नहीं डॉ भीमराव अंबेडकर की कहीं बातों पर अमल करें बहुजन हिताय बहुजन सुखाय -गादरे*

मेरठ:- जय जय जय भीम के नारे नहीं फूल माला आरती नहीं बल्कि बाबा भीमराव अंबेडकर साहब के विचारधारा पर चलकर दिखाएं बहुजन हिताय बहुजन सुखाय।

बहुजन मुक्ति पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष राजुद्दीन गादरे ने 132 वीं विश्व रत्न भारत रत्न डा भीमराव अम्बेडकर जन्म जयंती समारोह के अवसर पर प्रोग्रामो में हिस्सा लिया। श्री गादरे ने कहा कि बाबा साहब ने विश्व में सर्वाधिक शिक्षा ग्रहण कर दिखला दिया कि इंसान को मौका मिले तो सब कुछ हासिल कर सकते हैं। जब इंसान को ब्लड की जरूरत होती है तब तो जान बचाने की चिंता होती है। तब नहीं देखता कि कौन ऊंच है कौन नीची जाति का खून है। हम लोग जाति धर्म को आधार मानकर मानवता क्यों भूल जाते हैं। बाबा भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवन का बलिदान अपने बच्चों का अपने परिवार का बलिदान दिया हम-सब भारतीयों के लिए। इस कुर्बानी को हमें नहीं भूलना चाहिए और हमें ऊंच नीच का भेदभाव खत्म करने के लिए महामानव आखरी नबी मोहम्मद साहब ने 1445 वर्ष पूर्व कहा था कि जन्म से लेकर मरण तक इल्म शिक्षा हासिल करते रहना चाहिए। ऐसे ही बाबा भीमराव अंबेडकर ने कहा कि शिक्षा शेरनी का वह दूध है जो इसे पिएगा वही दहाड़ेगा हमें समाज को बदलने के लिए खुद को बदलना होगा। हमारे पैरों में जूते भले ही ना हो लेकिन हमारे हाथों में किताबें होनी चाहिए आज हम लोग वक्त गप्पे लड़ा कर जीवन व्यतीत कर रहे हैं। आज हमें शिक्षा, बेरोजगारी, महंगाई, अत्याचार 75 साल की आजादी के बाद भी झेलने पड़ रहे हैं। आज भी हम गुलाम से बद्तर क्यों?डॉ भीमराव अंबेडकर की 125 वीं जयंती पर 2015 से प्रत्येक वर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। इस दिन को राष्ट्रीय विधि दिवस के रूप में मनाया जाता था। डॉ अंबेडकर संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। सभा ने भारतीय संविधान को 2 वर्ष11महीने 18 दिन में लगभग एक करोर रुपये की लागत से इसे तैयार किया था। डॉ राजेन्द्र प्रसाद को संविधान सभा का 16 दिसंबर 1946 को स्थायी अध्यक्ष मनोनीत किया गया था। 26 जनवरी 1950 को देश में लागू किया गया था। विश्व रत्न बोधिसत्व सँविधान रचयिता बाबा साहब भीम राव आंबेडकर ज़ी की जन्म जयन्ती पर कोटि-कोटि सलाम। यदि आप बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को वास्तव में मानते हैं तो मुझे इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप उनकी जयन्ती पर कितना ढोल पीटते हैं या डीजे पर थिरकते हैं या पूरा नीला-नीला कर देते हैं। बल्कि मायने ये‌ रखेगा कि बाबा साहब के तीन नारों:

 *1. शिक्षित करो* 

 *2. संगठित करो* 

 *3. संघर्ष करो* 

इन पर जमीन पर कितना काम करते हैं!

यदि आप *समाजसेवी हैं, या किसी *सामाजिक संगठन* से जुड़े *कार्यकर्ता हैं, या स्वतंत्र समाजसेवी हैं अथवा विद्यार्थी हैं तो आपका " *धर्म*" है कि पहले तो आप बाबा साहब की लिखी एक-एक किताब एक एक जन्मदिन पर पढ़ते चलिए‌। आप स्वयं बहुजन साहित्य पढ़िए और बढ़िया ज्ञान के साथ आपको संघर्ष करने का तरीका, लोगों से मिलने का तरीका, मानवता की रक्षा के उपाय... ये सब कुछ बहुजन साहित्य खासकर बाबा साहब के लिखे ओरिजिनल साहित्य तथा बौद्ध साहित्य से प्राप्त होगा।

कहते हैं कि समय अनुकूल हो और आप वैभवशाली हों तो दूसरों की ‌मदद कीजिए। लेकिन समय विपरीत हो और आप कुछ न कर पा रहे हों तो "मेहनत‌ कीजिए"। तो आप भी तब तक स्वयं पर मेहनत कीजिए, किताबें पढ़िए बाबा की लिखी हुई और सीधे उन्ही से रू-ब-रू होइए। जय भारत जय संविधान।

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